Sunday, August 30, 2015

Planets according to relatives

Planets according to relatives


ग्रह अपने आसपास रिश्तेदार के रूप में है.
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ग्रह का रूप अपने रिस्तेदार के रूप में भी सामने आता है,
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सूर्य
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ग्रहों में सूर्य को पिता के स्वरूप में जाना जाता है ज्यादातर सभी जगह पुत्र का नाम पिता के द्वारा ही दिया जाता है, पिता के द्वारा ही जन्म सम्भव है,यानी सूर्य पिता है,सूर्य आत्मा और सांस को देने वाला है, जो एक दिन और रात में इक्कीस हजार छ: सौ बार सांस का आना जाना है,वह केवल सूर्यपि रूपी पिता के द्वारा दिये गये जीवन के द्वारा ही संभव है,नाम जाति गोत्र बनावट सब पिता पर ही निर्भर करते है,

Saturday, August 29, 2015

Why women are not allowed to break coconut

Why women are not allowed to break coconut


रहस्य: नारी इस कारण कभी नहीं फोड़ती नारियल

नारियल को श्रीफल के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की जब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया तो वे अपने साथ तीन चीजें- लक्ष्मी, नारियल का वृक्ष तथा कामधेनु लाए इसलिए नारियल के वृक्ष को श्रीफल भी कहा जाता है। श्री का अर्थ है लक्ष्मी अर्थात नारियल लक्ष्मी व विष्णु का फल।

SOME COMBINATION FOR WEALTH IN ASTROLOGY


SOME COMBINATION FOR WEALTH IN ASTROLOGY

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The Houses which signify Money is astrology are – 1st, 2nd, 5th, 9th and 11th House.

1st House = First house represent you and nothing can be start without you so power of Lagan and Lagan Lord is prime important.

2nd House = This house is known as money house hence planets sitting in this house and lord of second house is very imp while calculating money in the chart.

5th House = This house signify noble deeds done in previous birth hence fifth house and its lord is important.

Wednesday, July 22, 2015

Sukhi shadi shuda jeevan ke achook upay

Sukhi shadi shuda jeevan ke achook upay

1. कन्या के सुखी विवाहिक जीवन के लिए विवाह के पश्चात् जब कन्या की विदाई होने वाली हो तो किसी पीले रंग के धातु के लोटे में गंगाजल लेकर,उसमें थोडी सी पिसी हल्दी मिलाएं फिर एक तांबे का सिक्का उस लोटे में डालकर कन्या के ऊपर से 7 बार उतार कर उसके आगे गिरा दें, कन्या का विवाहिक जीवन सुखमय रहेगा ।
2. यदि कन्या विवाह के चार दिन पूर्व साबुत हल्दी की ७ गांठे, पीतल के ३ सिक्के, थोडा सा केसर, गुड और चने की दाल इन सबको एक पीले वस्त्र में बाँधकर अपनी ससुराल की दिशा में उछाल दे तो उसको अपने पति और ससुराल के अन्य सभी सदस्यों का सदैव भरपूर प्यार मिलेगा।

Nazar se bachne ke achook upay


Nazar se bachne ke achook upay

क्या आपको किसी की नज़र लग गई है ?

हम अक्सर यह सुनते हैं कि बच्चे को बुरी नजर लग गई या नजर लगने से दुकान बंद हो गई। नजर किसी भी सुंदर या अच्छी चीज को लग सकती है जैसे- सुंदर बच्चे को, दुकान को, घर को
आदि। ऐसे में बुरी नजर से मुक्ति पाने के लिए टोने- टोटके ही अपनाएं जाते हैं। अगर आपके घर के किसी सदस्य या आप पर बुरी नजर का प्रभाव है तो नीचे लिखे टोटके अपनाकर बुरी नजर से मुक्ति पा सकते हैं।

उपाय .....

Upay to Win Court Cases

Upay to Win Court Cases

मुकदमें में विजय पाने के कुछ खास उपाय
1. जब भी आप अदालत में जाएँ तो किसी भी हनुमान मंदिर में धूप अगरबत्ती जलाकर, लड्डू या गुड चने का भोग लगाकर एक बार हनुमान चालीसा और बजरंग बान का पाठ करके संकटमोचन बजरंग बलि से अपने मुकदमे में सफलता की प्रार्थना करें .........आपको निसंदेह सफलता प्राप्त होगी ।
2. आप जब भी अदालत जाएँ तो गहरे रंग के कपड़े ही पहन कर जाएँ ।
3. अपने अधिवक्ता को उसके काम की कोई भी वास्तु जैसे कलम उपहार में अवश्य ही प्रदान करें ।
4. अपने कोर्ट के केस की फाइलें घर में बने मंदिर धार्मिक स्थान में रखकर ईश्वर से अपनी सफलता, अपनी रक्षा के लिए प्रार्थना करें ।

Friday, June 19, 2015

Mantra For Pitra Dosh Nivaran Pitra Shanti

Mantra For Pitra Dosh Nivaran & Pitra Shanti


पितृदोष और पितृशांति के लिए मंत्र :-

पितृदोष क्या है और कैसे होता है:- जब किसी भी व्यक्ति की कुंडली के नवम पर जब सूर्य और राहू की युति हो रही हो तो यह समझा जाता है कि उसके पितृ दोष योग बन रहा है | भारतीय संस्कृति में पुराणों और शास्त्रों के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है,  उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते है | यह योग व्यक्ति की कुण्डली में एक ऎसा दोष है जो सभी प्रकार के दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को पितृ दोष के नाम से जाना जाता है |

व्यक्ति की कुन्डली का नवम् भाव अथवा घर धर्म का सूचक है तथा यह पिता का घर भी होता है | इसलिए अगर किसी की कुंडली में नवम् घर में ग्रहों कि स्थिति ठीक नहीं है अर्थात खराब ग्रहों से ग्रसित है तो इसका तात्पर्य है कि जातक के पूर्वजों की इच्छायें अधूरी रह गयीं थी अत: इस प्रकार का जातक हमेशा तनाव में रहता है एवं उसे मानसिक, शारीरिक तथा भौतिक समस्याओं और संकटों का सामना कारण पडता है |
अत: सपष्ट है कि जातक का नवां भाव या नवें भाव का मालिक राहु या केतु से ग्रसित है तो यह सौ प्रतिशत पितृदोष के कारणों में माना जाता है |